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A Newsletter Dedicated to Celebrating Consciousness

मालूम है राधे,

हम दोनों इस तालाब और कमल की तरह हैं…

मैं सब कुछ खुद में समां लेता हूँ ताकि तू खिलती रहे, मुस्कुराती रहे…

उदास न हो राधे, जब भी तू खिलती है, मुस्कुराती है,

मैं भी संग खुश होता हूँ तेरे…

पगली,

ये जो हल्की लहरें और तरंगें देख रही हैं ना तू पानी में,

वो तरंगें मेरे मन में उठ रही ख़ुशी की तरंगें है,

तुझे खिलता और मुस्कुराता देख…

मैं और तू एक ही हैं, अलग नहीं…

क्योंकि तालाब बिना कमल नहीं, और कमल बिना तालाब सूना…

चल, अब हट ना कर और मुस्कुरा दे…

मुस्कुरा ना और देख ये हलकी लेहरें, तरंगें…☺

हंसी मेरी राधे हंसी…

- नासमझ रचना